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अमेरिका के लिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पूरी तरह खोलना क्यों है बेहद मुश्किल? जानिए इनसाइड स्टोरी

 Written By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1
 Published : Jul 14, 2026 11:28 pm IST,  Updated : Jul 14, 2026 11:31 pm IST

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ईरान के नियंत्रण से मुक्त कराकर तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य करना अमेरिका के लिए एक बड़ी सैन्य और राजनीतिक चुनौती बन गया है।

Strait of Hormuz- India TV Hindi
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज Image Source : AP

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार को ऐलान किया कि अब होर्मुज का मालिक अमेरिका है और उस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से वह 20 प्रतिशत टैक्स वसूलेगा लेकिन मंगलवार को ट्रंप खुद उस बयान से पलट गए हैं। दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप पिछले कई हफ्तों से ईरान पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से फिर से खोलने का दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे हवाई हमलों और नौसेना की नाकाबंदी से लेकर बातचीत और पूरी सभ्यता को नष्ट करने की धमकियों तक, हर तरह के तरीके अपना रहे हैं। लेकिन अभी तक उम्मीद के मुताबिक सफलता उन्हें नहीं मिल पाई है।

भारी सैन्य बल की जरूरत

जानकारों का कहना है कि मिडिल ईस्ट के इस शिपिंग रूट पर ऑयल टैंकरों की आवाजाही को युद्ध से पहले जैसी स्थिति में लाने के लिए अमेरिकी युद्धपोतों के बहुत बड़े बेड़े की ज़रूरत पड़ सकती है, या फिर ईरान की ज़मीन पर हज़ारों अमेरिकी सैनिकों को तैनात करना पड़ सकता है। रुक-रुक कर हो रही लड़ाई के बावजूद ईरान अब भी फ़ारस की खाड़ी के संकरे रास्ते में जहाज़ों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बना सकता है।

मुश्किल में फंसे ट्रंप

ईरान का कहना है कि इस जलमार्ग पर उसका नियंत्रण है। इस रूट से होकर दुनिया का 20% तेल गुज़रता है। वहीं, पिछले हफ़्ते दोनों पक्षों के बीच कई झड़पें हुई हैं और गोलीबारी भी हुई है। दरअसल ट्रंप एक मुश्किल हालात में फंसे हुए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुजमें कमर्शियल शिपिंग रुकी हुई है, तेल की कीमतें फिर से बढ़ रही हैं और ईरान ने झुकने का कोई संकेत नहीं दिया है। इस युद्ध को कई अमेरिकी भी पसंद नहीं कर रहे हैं। वहीं पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें बढ़ने के साथ हीआने वाले मध्यावधि चुनावों में यह एक अहम मुद्दा बन सकता है।

इच्छाशक्ति की हो रही परीक्षा

कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के मिडिल ईस्ट प्रोग्राम के नॉन-रेसिडेंट स्कॉलर और फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में पॉलिटिक्स और इंटरनेशनल रिलेशंस के प्रोफेसर एरिक लोब ने कहा, "उन्हें लगा था कि हालात काबू में हैं, लेकिन अब तनाव फिर से बढ़ रहा है और बाज़ार इस पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं।" लोब ने कहा, "यह असल में इच्छाशक्ति की परीक्षा है कि ईरानी लोग कितना आर्थिक नुकसान सहने को तैयार हैं और फिर नवंबर में होने वाले चुनावों से पहले ट्रंप और रिपब्लिकन के लिए यह कितना आर्थिक नुकसान और राजनीतिक जोखिम बन सकता है।"

होर्मुज को सुरक्षित करने के लिए ज़मीनी सैनिकों की ज़रूरत 

वॉशिंगटन में मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट में स्कॉलर बनने से पहले, कैंपबेल RAND में रिसर्चर थे, जहां उन्होंने ईरान के ख़िलाफ़ वॉर-गेम परिदृश्यों (सिमुलेशन) पर काम करने के लिए अमेरिकी सेना के साथ मिलकर काम किया था।

कैंपबेल ने कहा कि ईरान हमले के जोखिम को कम करने के लिए अलग-अलग जगहों पर अपने हथियारों के पुर्ज़े बनाता है। उसकी सैन्य इकाइयों को अक्सर तेहरान से आदेश का इंतज़ार किए बिना काम करने की छूट होती है। वे अक्सर एक जगह इकट्ठा नहीं होते, जिससे हवाई हमले कम असरदार हो जाते हैं। कैंपबेल ने कहा, "ऐसी किसी भी स्थिति की कल्पना करना बहुत मुश्किल है जहां ज़मीनी सेना के बिना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को ठीक से सुरक्षित किया जा सके।"

कैंपबेल ने कहा कि ऐसा करने के लिए हज़ारों सैनिकों की ज़रूरत होगी, न सिर्फ़ ईरान के छिपे हुए हथियारों को नष्ट करने के लिए, बल्कि सैकड़ों मील लंबे समुद्र तट और ज़मीन के बड़े हिस्से को सुरक्षित करने के लिए भी। अमेरिकी सैनिकों को विद्रोहियों के हमलों का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह की फ़ोर्स तैयार करने में कुछ महीने लगेंगे और इसमें "बहुत ज़्यादा खर्च" आएगा।

अमेरिकी नुकसान का खतरा 

जानकारों का कहना है कि होर्मुज से कमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का एक और तरीका अमेरिकी युद्धपोतों द्वारा नागरिक जहाजों को एस्कॉर्ट जारी रखना और इसे और बढ़ाना हो सकता है। लेकिन इसके साथ अपनी चुनौतियां और लागत भी जुड़ी हैं।

अमेरिका ने 1980 के दशक में ऐसा ही एक एस्कॉर्ट ऑपरेशन चलाया था, जब ईरान ने पड़ोसी देश इराक के साथ युद्ध के दौरान जहाजों को निशाना बनाया था। अमेरिकी सेना के पूर्व विश्लेषक माइकल आइज़ेनस्टैड ने कहा कि आज ऐसी कोशिश के लिए बड़ी संख्या में अमेरिकी युद्धपोतों की ज़रूरत होगी, जबकि अभी अमेरिकी बेड़ा 1980 के दशक की तुलना में छोटा है।

आइज़ेनस्टैड ने कहा, "इसके लिए आपको अमेरिकी बेड़े के एक बड़े हिस्से को लंबे समय तक इसी काम में लगाना होगा।" उन्होंने कहा कि आज हालात कहीं ज़्यादा मुश्किल हैं क्योंकि ईरान ने एडवांस्ड क्षमताएं हासिल कर ली हैं, जिनमें ड्रोन और मिसाइल हमले करने की क्षमता भी शामिल है।

उन्होंने कहा, "अगर हम इस काम को सफल बनाने के लिए ज़रूरी कदम उठाते हैं - जिसमें एंटी-क्रूज़ मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स को खत्म करने के लिए ज़मीन पर सैनिकों को उतारना भी शामिल हो सकता है - तो अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने या घायल होने का खतरा बढ़ सकता है; और अगर आप एस्कॉर्ट ऑपरेशन भी करते हैं, तो भी नुकसान की आशंका बढ़ सकती है।"

ईरान की धमकियों से ही डरकर दूर जा सकते हैं जहाज़ 

ईरान की बारूदी सुरंगों (माइन्स) के डर से कमर्शियल जहाज़ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पारंपरिक रास्तों से गुज़रने से बच रहे हैं। ईरान ने मांग की है कि जहाज़ उसके तट के पास वाले रास्ते का इस्तेमाल करें और युद्ध खत्म करने के लिए किसी अंतरिम समझौते के तहत वह उनसे फ़ीस भी ले सकता है। जहाज़ तेज़ी से ओमान के तट के साथ दक्षिणी रास्ते से गुज़र रहे हैं, जहाँ अमेरिकी निगरानी ऑपरेशन के तहत उन्हें ड्रोन और विमानों से रास्ता दिखाया जाता है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के कुछ पारंपरिक रास्तों पर बारूदी सुरंगें हटाने का काम चल रहा है, लेकिन "वैकल्पिक रास्ते खुले हुए हैं।" दक्षिणी रास्ते से गुज़रने के बावजूद जहाज़ों पर ईरानी हमले नहीं रुके हैं, जिसके कारण अमेरिकी सेना को ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार साइटों, मिसाइल और ड्रोन उपकरणों और छोटी नावों पर हमले करने पड़े हैं। (इनपुट-एपी)

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